शनिवार, 2 अक्टूबर 2010

हर कोई आज कल यहाँ धर्म धर्म करता रहता है...
बापू तेरा भारत वर्ष अब वर्ष भर जलता रहता है ,

नेता सरे मतलब साधू हो गये...तेरे तत्वों को त्याग कर...सत्ता भोगी हो गए...
अब तो हर नेता बस कुर्सी पर ललचाता  है...बापू तेरा भारत वर्ष अब वर्ष भर जलता रहता है ,

अज तुम्हारा "हे राम" नाम...धर्म की बेडी में लिपटा है...
हिन्दू  अपने राम की तो मुस्लिम अल्लाह की नुमाइश करता  है...
पैगम्बर-के साथ में बैठा राम अपनी ही दुर्दशा देखता रोता रहता है...
बापू तेरा भारत वर्ष अब वर्ष भर जलता रहता है ,

भ्रष्ट कथन और भ्रष्ट चलन आज की निति यही  है ....
धनबल्वान का मिथ्या वचन भी सही..और सत्य कथनीय दुर्बल पापी ठहराया जाता है...
सत्य वचन के कथन पर पक्षों द्वारा संग्राम उठाया जाता है...
बापू तेरा भारत वर्ष अब वर्ष भर जलता रहता है ,......

नमन तुझे...वंदन है तुझे....तू ही सत्य का ज्ञाता है...
शत शत बार ....चरणों पर तेरे ये आज का पापी प्रारब्ध शीश नमता रहता है...
बापू तेरा भारत वर्ष अब वर्ष भर जलता रहता है ,
..........................***प्रारब्ध***...............................

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