रविवार, 17 अक्टूबर 2010

मैं रावन...क्या सच में मैं बुरा था...?

मैं रावन...क्या सच में मैं बुरा था...?
क्या तुम भी सोचते हो के मैं अत्याचारी था, दुराचारी था ..?

मैं तो बस पत्थर भर था... प्रभु के धर्म सेतु का ...
मैं तो बस निमित्त मात्र था... अधर्म के निखंदन का ...
...
मैंने न सोचा, कौन क्या कहेगा ...
कौन मुझे नराधम कहेगा...राक्षस या...व्यभिचारी कहेगा...
मैंने न सोचा , कभी दशहरे पर मेरा भरे चौक दहन भी होगा ...

मैं तो बस अपना करम किये जा रहा था...
अपने प्रभु प्रीत खातिर खुदका बलिदान किये जा रहा था....

मैंने सीता हरण किया ये आप का दृष्टिकोण हैं..
मैंने कभी कोई हरण किया ही नहीं....
मैं तो बस अपनी बेटी को मायके लेकर आया था...
बेटी को मायके लाना कोए हरण नहीं...

मुझको जो दशानन कहते हैं आज के युग के ये वासी....
अज का युग तो मेरे युग से भी ज्यादा अन्धकार में डूबा हैं...
लाखो रावन है पनपे यहाँ...अब तो मुझको भी डर सा लगता हैं...

मैं खुद आज प्रभु से एक और गुहार लगता हु...
आप के आने की खातिर फिर एक बार जन्म लेना चाहता हु...
मंजूर हैं मुझको मेरा दहन दोबारा...लेकिन धरती पर फिर से सतयुग आये...
मुझे मिटने की मंशा से आप को फिर धरती पर बुलाता हु...

मैं रावन..क्या सच में मैं बुरा था...??

..............................***प्रारब्ध***..........................

शनिवार, 2 अक्टूबर 2010

हर कोई आज कल यहाँ धर्म धर्म करता रहता है...
बापू तेरा भारत वर्ष अब वर्ष भर जलता रहता है ,

नेता सरे मतलब साधू हो गये...तेरे तत्वों को त्याग कर...सत्ता भोगी हो गए...
अब तो हर नेता बस कुर्सी पर ललचाता  है...बापू तेरा भारत वर्ष अब वर्ष भर जलता रहता है ,

अज तुम्हारा "हे राम" नाम...धर्म की बेडी में लिपटा है...
हिन्दू  अपने राम की तो मुस्लिम अल्लाह की नुमाइश करता  है...
पैगम्बर-के साथ में बैठा राम अपनी ही दुर्दशा देखता रोता रहता है...
बापू तेरा भारत वर्ष अब वर्ष भर जलता रहता है ,

भ्रष्ट कथन और भ्रष्ट चलन आज की निति यही  है ....
धनबल्वान का मिथ्या वचन भी सही..और सत्य कथनीय दुर्बल पापी ठहराया जाता है...
सत्य वचन के कथन पर पक्षों द्वारा संग्राम उठाया जाता है...
बापू तेरा भारत वर्ष अब वर्ष भर जलता रहता है ,......

नमन तुझे...वंदन है तुझे....तू ही सत्य का ज्ञाता है...
शत शत बार ....चरणों पर तेरे ये आज का पापी प्रारब्ध शीश नमता रहता है...
बापू तेरा भारत वर्ष अब वर्ष भर जलता रहता है ,
..........................***प्रारब्ध***...............................